ठहराव

नींद नहीं इन आँखों मे
पर कोई सपना भी तो नहीं

देखती हूँ खुली आँखों से
पर कोई अपना भी तो नहीं

इंतजार है आँखों मे
पर ये उसका तो नहीं

रोक रखा है जज़्बातों को
पर ये बूंदें तो रूकती नहीं

नहीं चाहती नज़रें कुछ कहना
पर दुनिया की नज़रो से ये छुपती भी तो नहीं

बंद भी कर लूँ चाहे ये नज़रें
पर नज़ारे ठहरते भी तो नहीं

अजीब सफर है जिंदगी का कई बार बदलना चाहा
पर चाहने से ये जिंदगी बदलती भी तो नहीं

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