तू काफी नहीं

जिंदगी तू काफी नहीं जीने के लिए
कोई तो वजह चाहिए हंसने के लिए रोने के लिए

जो आए लब पे हंसी
तो लगता है तू कितनी हंसीन है
जो आए आँखो मेंं आँसू
तो लगता है तू कितनी दर्दनाक है
चाहे नज़रिया मेरा बदलता है
पर इलजा़म तुझपे ही आता है

फिर भी तू काफी नहीं जीने के लिए
कोई और भी वजह चाहिए हंसने के लिए रोने के लिए

समझ नही आता कि क्या कहूं
तुझपे तरस खाऊँ या गिला करुं
पता नहीं कि तू मुझे रौंद रही
या कुचल रहा मैं तुझे अपने कदमों तले
चाहे पाँव किसी के भी हों
पर दर्द है सिर्फ मेरे लिए

जिंदगी तू क्यूूँ काफी नहीं जीने के लिए
क्यों कोई और वजह चाहिए हंसने के लिए रोने के लिए

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